टॉयलेट सीट पीली क्यों पड़ती है? ये आसान नुस्खे अपनाएं
टॉयलेट सीट रोज साफ करने के बावजूद पीली पड़ जाती है। ये शिकायत लगभग हर घर में सुनने को मिलती है। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब मेहमान आने वाले हों और सीट का पीलापन किसी भी सफाई से नहीं जाता।
पहले समझते हैं कि दाग होते क्यों हैं, फिर बात करेंगे उन घरेलू नुस्खों की जो सच में काम करते हैं।
पीलापन आता कहाँ से है
यूरिन के मिनरल्स
यूरिन में यूरिया, यूरिक एसिड, कैल्शियम और फॉस्फेट होता है। जब यह सीट पर कुछ देर पड़ा रहता है और सूख जाता है, तो ये तत्व मिलकर एक पीली परत छोड़ देते हैं। यही सबसे बड़ी वजह है कि सीट के किनारों पर पीलापन जमा होता है, क्योंकि वहां तक ब्रश आसानी से नहीं पहुंचता।
हार्ड वॉटर
अगर आपके इलाके का पानी हार्ड है, यानी उसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम ज्यादा है, तो वो भी सतह पर परत जमा देता है। समय के साथ यह परत पीली या भूरी दिखने लगती है, खासकर सीट के नीचे और बाउल के अंदर।
तेज केमिकल क्लीनर
यह बात ज्यादातर लोगों को पता नहीं होती। रोज तेज ब्लीच या एसिड बेस्ड क्लीनर इस्तेमाल करने से प्लास्टिक की सीट का रंग बदलने लगता है। सफाई तो हो जाती है, लेकिन सीट धीरे-धीरे पीली पड़ती जाती है क्योंकि केमिकल प्लास्टिक की ऊपरी कोटिंग को कमजोर कर देता है।
धूप
अगर बाथरूम की खिड़की से सीधी धूप सीट पर पड़ती है, तो UV रेज़ भी सफेद प्लास्टिक को समय के साथ पीला कर देती हैं। यह वजह कम लोगों को पता होती है, लेकिन असली है।
घर पर मौजूद चीजों से पीलापन कैसे हटाएं
बेकिंग सोडा और सिरका
यह कॉम्बिनेशन सबसे भरोसेमंद है। सीट और बाउल पर सफेद सिरका डालें, 15 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर ऊपर से बेकिंग सोडा छिड़कें। दोनों मिलकर झाग बनाएंगे, यही झाग दाग को ढीला करता है। 5 से 10 मिनट बाद ब्रश से रगड़ें और पानी से धो लें। जिद्दी दाग के लिए यह पेस्ट रातभर भी छोड़ा जा सकता है।
नींबू
नींबू का रस सीधे पीले हिस्सों पर लगाएं, आधे घंटे के लिए छोड़ दें, फिर ब्रश से साफ करें। नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड मिनरल डिपॉज़िट को तोड़ने में मदद करता है।
फ्रूट सॉल्ट
सीट को हल्का गीला करके उस पर फ्रूट सॉल्ट डालें, फिर ब्रश से रगड़ें और गर्म पानी डालें। इसमें भी सिट्रिक एसिड होता है, जो असर तेजी से दिखाता है।
बेकिंग सोडा और हाइड्रोजन पेरोक्साइड
गहरे जमे दागों के लिए यह ज्यादा असरदार है। पहले सीट पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड स्प्रे करें, फिर बेकिंग सोडा छिड़कें। दोनों मिलकर झाग बनाएंगे। 30 मिनट बाद ब्रश से साफ करें।
इन सबमें एक बात कॉमन है, दाग हटाने के लिए कुछ देर रुकना जरूरी है। जल्दबाजी में सिर्फ रगड़ने से दाग पूरी तरह नहीं जाता।
दाग दोबारा न आएं, इसके लिए क्या बदलें
घरेलू नुस्खे दाग हटा तो देते हैं, लेकिन अगर रोज इस्तेमाल होने वाला टॉयलेट क्लीनर एसिडिक या ज्यादा केमिकल वाला है, तो कुछ ही महीनों में दाग वापस आ जाएंगे। यहीं पर फर्क पड़ता है कि आप रोजाना कौन सा क्लीनर इस्तेमाल कर रहे हैं।
BioClean SHINE एक ऐसा टॉयलेट क्लीनर है जो एसिड की जगह एंजाइम बेस्ड फॉर्मूला इस्तेमाल करता है। यह सीट की सतह को नुकसान पहुंचाए बिना गंदगी और दाग हटाता है, यानी रोज इस्तेमाल करने पर भी सीट का रंग खराब नहीं होता। साथ ही यह टॉयलेट, बेसिन और अलग-अलग सरफेस पर इस्तेमाल हो सकता है, सिर्फ सीट तक सीमित नहीं है।
एक और बात जो कम लोग जानते हैं, तेज एसिडिक क्लीनर सिर्फ सीट को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि सेप्टिक टैंक के अंदर मौजूद बैक्टीरिया को भी खत्म कर देते हैं, जिससे टैंक में बदबू और सफाई की समस्या शुरू हो जाती है। इस बारे में हमने सेप्टिक टैंक से बदबू क्यों आती है में विस्तार से बताया है।
रोज की आदतें जो दाग बनने से रोकती हैं
हर बार फ्लश जरूर करें, चाहे इस्तेमाल कितना भी छोटा क्यों न हो। बिना फ्लश किया यूरिन सूखकर दाग बन जाता है।
हफ्ते में कम से कम दो बार अच्छी तरह स्क्रब करें, सिर्फ सीट के ऊपरी हिस्से को नहीं, किनारों और नीचे के हिस्से को भी।
धातु के ब्रश या स्क्रबर का इस्तेमाल न करें। इनसे प्लास्टिक पर बारीक खरोंचें पड़ जाती हैं, और दाग उन्हीं खरोंचों में जाकर बैठ जाते हैं, जिससे अगली बार सफाई और मुश्किल हो जाती है।
अगर आपका पानी हार्ड है, तो हफ्ते में एक बार क्लीनिंग सॉल्यूशन को कुछ घंटों के लिए छोड़ना बेहतर रहता है, ताकि मिनरल जमने का मौका ही न मिले।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टॉयलेट सीट रोज साफ करने के बावजूद पीली क्यों रहती है?
ज्यादातर मामलों में वजह यूरिन के मिनरल्स या हार्ड वॉटर का जमाव होता है, जो सीट के किनारों और नीचे के हिस्सों में जमा हो जाता है। रोज की सफाई अक्सर इन हिस्सों तक ठीक से नहीं पहुंचती, इसलिए दाग बनते रहते हैं।
क्या ब्लीच से पीले दाग हमेशा के लिए साफ हो जाते हैं?
ब्लीच दाग को कुछ हद तक हल्का कर सकता है, लेकिन बार-बार इस्तेमाल करने पर प्लास्टिक की सतह को नुकसान पहुंचाता है, जिससे सीट का रंग और खराब हो सकता है। बेहतर है कि ब्लीच की जगह सिरका, बेकिंग सोडा या नींबू जैसे हल्के विकल्प अपनाएं।
क्या एंजाइम बेस्ड टॉयलेट क्लीनर सच में फर्क डालता है?
हां। एसिडिक क्लीनर समय के साथ प्लास्टिक की कोटिंग को कमजोर करते हैं, जिससे दाग जल्दी बनते हैं। एंजाइम बेस्ड फॉर्मूला जैसे BioClean SHINE सफाई तो उतनी ही करता है, लेकिन सतह को नुकसान नहीं पहुंचाता, इसलिए रोज इस्तेमाल करने पर भी सीट लंबे समय तक साफ रहती है।
धूप से भी टॉयलेट सीट पीली पड़ सकती है क्या?
हां, अगर बाथरूम की खिड़की से सीधी धूप सीट पर पड़ती है तो UV रेज़ धीरे-धीरे प्लास्टिक का रंग बदल देती हैं। इसे रोकने के लिए खिड़की पर हल्का पर्दा या UV फिल्म लगाई जा सकती है।
टॉयलेट सीट कब बदलनी चाहिए, कब सिर्फ साफ करनी चाहिए?
अगर दाग सिर्फ सतह पर हैं और सीट का प्लास्टिक अभी भी चिकना और बिना खरोंच वाला है, तो घरेलू नुस्खों से सफाई काफी है। लेकिन अगर सीट पर गहरी खरोंचें हैं या प्लास्टिक भुरभुरा होने लगा है, तो सफाई की जगह बदलना ज्यादा किफायती रहता है, क्योंकि तब दाग बार-बार वापस आते रहेंगे।