सेप्टिक टैंक बनवाते समय यह गलतियां न करें

 सेप्टिक टैंक बनवाते समय न करें ये गलतियां

घर बनवाते समय ज्यादातर समय डिज़ाइन, टाइल्स और पेंट पर जाता है। सेप्टिक टैंक का काम आखिर में, जल्दबाज़ी में, किसी भी मिस्त्री से करवा दिया जाता है। यही वो गलती है जो तीन-चार साल बाद बदबू, ओवरफ्लो, और बार-बार पंपिंग के रूप में सामने आती है।

एक बार टैंक बन जाए तो उसे बदलना या सही करना मुश्किल और महंगा, दोनों होता है। इसलिए कंस्ट्रक्शन के वक्त ही कुछ चीज़ें ध्यान में रखना ज़रूरी है।

सही जगह और दिशा न चुनना

सबसे आम गलती यही होती है कि टैंक को बिना सोचे जहां जगह खाली दिखी, वहीं बना दिया जाता है। इसका सीधा असर टैंक के वेंटिलेशन, ड्रेनेज स्लोप, और भविष्य में एक्सेस पर पड़ता है।

वास्तु शास्त्र के हिसाब से भी सेप्टिक टैंक की प्लेसमेंट का अपना महत्व माना जाता है। परंपरागत रूप से सेप्टिक टैंक या वेस्ट डिस्पोज़ल सिस्टम को घर के नॉर्थवेस्ट या वेस्ट दिशा में बनाने की सलाह दी जाती है। नॉर्थईस्ट कोने को इस काम के लिए अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इसे घर की एनर्जी के लिए शुभ माना जाता है। चाहे कोई वास्तु माने या न माने, प्रैक्टिकल तौर पर भी यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि टैंक घर के मेन एंट्रेंस या किचन के बिल्कुल सामने न हो।

गलत साइज़ का टैंक बनवाना

बहुत से लोग फैमिली साइज़ के हिसाब से टैंक का साइज़ डिसाइड नहीं करते, सिर्फ मिस्त्री जो बता दे वही बना लेते हैं। छोटा टैंक जल्दी भर जाता है, ओवरफ्लो करता है, और बार-बार पंपिंग की ज़रूरत पड़ती है। सही साइज़ डिसाइड करने के लिए घर में रहने वाले लोगों की संख्या और डेली पानी के इस्तेमाल, दोनों का हिसाब लगाना ज़रूरी है।

पानी के सोर्स के पास टैंक बनवाना

बोरवेल, हैंड पंप या किसी भी ड्रिंकिंग वाटर सोर्स के बहुत पास सेप्टिक टैंक बनवाना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर टैंक में लीकेज हो, तो ग्राउंड वाटर कंटामिनेट होने का खतरा बढ़ जाता है। कम से कम 15 से 20 फीट की दूरी बनाए रखना, इस समस्या से बचने का सबसे आसान तरीका है।

वेंटिलेशन और पाइप का ध्यान न रखना

टैंक के अंदर गैसें बनती हैं, और अगर सही वेंटिंग नहीं है, तो यह गैसें वापस घर के प्लंबिंग सिस्टम में आ सकती हैं। इसी वजह से टॉयलेट या बाथरूम में अचानक बदबू आने लगती है। वेंट पाइप की हाइट और पोज़िशन कंस्ट्रक्शन के समय ही सही होनी चाहिए, बाद में इसे ठीक करना स्ट्रक्चरल काम बन जाता है।

मैनहोल कवर को एक्सेस के लिए न रखना

बहुत से टैंक इस तरह बनाए जाते हैं कि उन्हें बाद में खोलना ही मुश्किल हो जाता है, टाइल्स लगा दी जाती हैं या कंस्ट्रक्शन से कवर कर दिया जाता है। जब भी क्लीनिंग पाउडर डालना हो या कभी पंपिंग की ज़रूरत पड़े, यह एक बड़ी दिक्कत बन जाती है। एक प्रॉपर मैनहोल कवर छोड़ना, जो आसानी से खोला जा सके, भविष्य के मेंटेनेंस को काफी आसान बना देता है।

बनते ही गलत प्रोडक्ट इस्तेमाल करना शुरू कर देना

टैंक बन जाने के बाद लोग जल्दी में कुछ भी क्लीनर या केमिकल डाल देते हैं, यह सोचकर कि टैंक फ्रेश है तो कोई भी प्रोडक्ट चलेगा। एसिड या ब्लीच बेस्ड प्रोडक्ट नए टैंक में भी उतने ही हानिकारक हैं जितने पुराने में, क्योंकि यह अंदर डेवलप हो रहे गुड बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं। नया टैंक हो या पुराना, BioClean Septic का एंजाइम बेस्ड पाउडर इस्तेमाल करना हमेशा सेफर ऑप्शन होता है क्योंकि यह नेचुरल बैक्टीरियल बैलेंस बनाए रखता है।

रेगुलर इस्तेमाल के लिए एग्जैक्ट क्वांटिटी का अंदाज़ा लगाने के लिए dosage calculator काफी काम आता है, खासकर नए घर में जहां फैमिली साइज़ के हिसाब से डोज़ सेट करना होता है।

यह गलतियां आगे चलकर क्या समस्या बनती हैं

कंस्ट्रक्शन के वक्त की छोटी-छोटी गलतियां अक्सर सालों बाद बड़े मसले बन जाती हैं, जैसे स्लज जमना, बार-बार ओवरफ्लो, या टॉयलेट में परमानेंट बदबू। इसकी डिटेल हमने सेप्टिक टैंक में गाद जमने की समस्या वाले ब्लॉग में कवर की थी।

और अगर टैंक पहले से बन चुका है और अब इश्यू फेस हो रहे हैं, तो सेप्टिक टैंक की सफाई में होने वाली आम गलतियों वाला ब्लॉग यह समझने में मदद करेगा कि मेंटेनेंस में और क्या अवॉइड करना चाहिए।

कंस्ट्रक्शन के समय थोड़ी सी एक्स्ट्रा प्लानिंग, सही जगह, सही साइज़, और सही एक्सेस, आगे चलकर काफी पैसा और परेशानी बचा सकती है।

 

Back to blog